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सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
किसी को सताया यार ने ,किसी को धोखा मिला प्यार मे।
तोड़ा जमाने ने मिलकर उसे, रूठा था जिसका खुदा खुद से।
गम बना है जख्म, किसे दिखाए ,कुरेदने बैठे है सब।
बुलाने का उसके, इंतजार करते हम,
अपनी खुशियों को ,ब्याज पर चढ़ा बैठे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ,ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
मशवरे हमें मिले लाख,
मिला ना किसी का साथ,
तो मुझको हंसी आ गई।
हां मुझको हंसी आ गई।
खुद को खुद में दफन कर, आहो की स्याही से नाम लिखेंगे तेरा हम।
हर दर्द जख्म सहलेंगे हंसकर,जान मेरी कर्ज चुकाएंगे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ,ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
ख्वाब देखे हसीन,बनाना चाहता था तुझको अपना।
कमबख्त ,दिल भूल गया,सच नही होता हर सपना।
मर्द का ठप्पा लगा था, मुझ पर ।
रो भी ना सका मैं ,जी भर कर ।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
सौ दर्द है जिंदगी में, जीन्हें कर्ज बना बैठे हम।
मरहम माँगते ढूंढते ,जिंदगी उधार की बना बैठे हम।
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Last Updated
May 29, 2026