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मुसाफिर मंजिल का

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Lyrics

  

           (Intro)
(सराय की चांदनी थी,, मेरी दिलरुबा।
रहा चांद की तरह , उसका प्यार अधूरा
मुसाफिर हूँ मैं, चलता रहूंगा,
मंजिल की तलाश में ,भटकता रहूंगा,)



    ( Verse)
मुसाफ़िर मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।


मुसाफ़िर  मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।
****
      (Chorus)
दिल में अरमान बहुत, आँखों में कुछ सपने थे ।
बेवक्त की आँधी,  तोड़ गई भीतर-भीतर हमें।

 वो हमसफर राहें बदल गए,जिन्हें समझा था अपना ।
हम बस चलते ही रहे,बोझ लिये उनकी यादों का,

*****

    (Verse)
मुसाफ़िर  मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।


मुसाफ़िर  मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।


***
        (Bridge)

उम्मीदें लेकर तेरे दर पे ,था आया,
तन्हाई की ज़मीं लेकर ,था लोटा।
 नींद खो गई मेरी, आँखों में थी नमी।
मासूम चेहरे पर , मुस्कान थी झूठी।


कुछ बाते थी जुबान पर, कुछ यादें दिल में थी
मरने की चाहत थी , मगर अभी बात अधूरी थी।
हर मोड़ पर क़िस्मत ने ,इम्तिहान लिया
 जिसे चाहा दिल ने, उसी ने ठुकरा दिया ।

****
मुसाफ़िर  मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।


मुसाफ़िर मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।



      
     (Outro)
        
(यारो हमें वो ठिकाना ना मिला , जिसे मैं कह देता घर अपना ।
 मुसाफ़िर हूँ , रहूंगा चलता ।जब तलक ना मिले ,मुकाम अपना)
          
मुसाफ़िर मंजिल का,  सराय पर था रुका।
यारा कोई नहीं होता ,मंजिल से पहले अपना।


मुसाफ़िर मंजिल का,
मुसाफ़िर मंजिल का,
मुसाफ़िर मंजिल का,
सराय 
पर 
था रुका।

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Last Updated

May 29, 2026