Lyrics
बनाने वाले ने भी ,जाने क्या जोड़ी बनाई,
एक काना घोड़ा एक ,लंगड़ी घोड़ी बनाई।
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आज कुछ रोज़ बाद , सुलह की हुई उनसे बात ।
और बातों-बातों में ही ,जाने कब तक़रार हो गई।
एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
देखते ही देखते दिल की बस्ती जंग का मैदान हो गई।
एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
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रोज़ रोज़ एक सा स्वाद आ रहा,जाने खुदा क्या चाह रहा।
मौज-मौज में हो जाते शंख नाद, नहीं रहा बीता वक्त याद।
कहानी मेरी तहस-नहस हो गई,जब गंगू मेरी लक्ष्मी बाई हो गई।
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एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
देखते ही देखते दिल की बस्ती जंग का मैदान हो गई।
एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
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ना तोप, तीर चले ,चली ना तलवारे,
म्यानों से निकली जुबानों की शमशीरे ।
जंग बड़ी घमासान हो गई,
बिना लहू धरती लाल हो गई।
हथियार डालकर भी वो ग़ालिब ,
और जिंदगी मेरी कारज़ार हो गई।
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एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
देखते ही देखते दिल की बस्ती जंग का मैदान हो गई।
एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
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सांझ होते-होते यारो,समझौते पर फिर बात हुई।
मै हारा वो जीती, इस बात पर फिर तक़रार हो गई।
हम दोनों हक़ की राह में...... मुजाहिद हो गये।
नई जद्दोजहद कि ख़ातिर ज़ुबान बेकरार हो गई।
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एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
देखते ही देखते दिल की बस्ती जंग का मैदान हो गई।
एक तरफ़ मुहब्बत थी, सामने अदावत की फ़ौज हो गई,
एक तरफ़ मुहब्बत,
सामने अदावत,
दिल की बस्ती,
जंग का मैदान
हो.......... गई
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Last Updated
Jun 12, 2026