Home / Ek Man Brahm Mai, Ek Brahm Man Mai
single

Ek Man Brahm Mai, Ek Brahm Man Mai

0 Views
0
Verified Lyrics

Lyrics

[Verse 1]

तेरे दोनों कानों में भर रहा हूँ
तुझे-मुझे भगवान-सा कर रहा हूँ
तेरे दोनों कानों में भर रहा हूँ
तुझे-मुझे भगवान-सा कर रहा हूँ

एक मन ब्रह्म में, एक ब्रह्म मन में
तेरा-मेरा भेद अब हर रहा हूँ
जो गागर में है वही सागर में है
सागर कहे, मैं भी कभी गागर रहा हूँ

काया मिट्टी और मिट्टी काया है
भगवान कहे, मैं रूप बदल रहा हूँ
भगवान स्वयं एक गूढ़ भेद है
भेद कहे, मैं हर पल प्रकट हो रहा हूँ

भगवान तो हृदय में ही बसता है
मन कहे, समझने में देर कर रहा हूँ
जीवन में शाम सी हो तो क्या है
सूरज कहे, मैं फिर सवेरा कर रहा हूँ

रात से दिन और दिन से रात है
व्योम कहे, मैं प्रकाश बिखेर रहा हूँ
क्षण-क्षण भाग्य बदल रहा है
काल कहे, मैं सतत गोचर रहा हूँ

मुझे लगा मैं कर्म कर रहा हूँ
ब्रह्म कहे, मैं हिसाब कर रहा हूँ
ब्रह्म तुझमें और मुझमें है बसता
और मैं कब नहीं भीतर रहा हूँ

मैंने सोचा मैं अनुभव कर रहा हूँ
कहीं मैं इन बातों से डर रहा हूँ
अनुभव हुआ, मैं स्वयं अनुभव हूँ
ब्रह्म के अनुभवों में विचर रहा हूँ

एक मन ब्रह्म में, एक ब्रह्म मन में
ब्रह्म मुझमें, मैं ब्रह्म में उतर रहा हूँ
ब्रह्म मिले उसे जो ढूँढे ब्रह्म को
ब्रह्म में डूबकर ब्रह्म में तर रहा हूँ

मैं कुछ हूँ ही नहीं, तू भी नहीं
बस अपने ब्रह्म का स्मरण कर रहा हूँ
ब्रह्म स्वयं से है, मैं स्वयं ब्रह्म से
स्वयं से मिलने को मैं चल रहा हूँ
स्वयं त्वम् त्वम् स्वयं कर रहा हूँ

[Chorus]
तेरे दोनों कानों में भर रहा हूँ
मैं जन्मा ही नहीं, मरा भी नहीं
इस ब्रह्म में मैं सदा जी रहा हूँ

तेरे दोनों कानों में भर रहा हूँ
तुझे-मुझे भगवान-सा कर रहा हूँ
हाँ, मैं भर रहा हूँ, हाँ जी भर रहा हूँ
हाँ, मैं भर रहा हूँ, हाँ जी भर रहा हूँ

[Outro]
तेरे दोनों कानों में भर रहा हूँ
तुझे-मुझे भगवान-सा कर रहा हूँ
(हाँ, मैं भर रहा हूँ, हाँ जी भर रहा हूँ)
(हाँ, मैं भर रहा हूँ)


Fast Facts

Total Views

0

Last Updated

Jul 23, 2026